।। श्री गुरु चरण कमलेभ्यो नम: ।। ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नम: ।। ॐ ह्रिं मम प्राण देह रोम प्रतिरोम चैतन्य जाग्रय ह्रीं ॐ नम: || ॐ भुर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धिमही धियो योन: प्रच्योदयात|| गुरु वाणी: Such thoughts are missing in animals, birds and insects. Even gods and demons do not think thus. This is why humans are said to be the most unique in the universe. But if a human never thinks why he has been created by the Lord, what the goal of his life then he is no better than the animals.

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Wednesday, August 3

Sahasraakshari Siddha Chandi Mahavidya Sadhana

Siddha Chandi Mahavidya Sadhana:


Mahavidya Siddha Chandi
Sahasraakshari Siddha Chandi Mahavidya Sadhana is simple to accomplish but very important too. This Sadhana can be accomplished on Kali Jayanti at Night.

Sadhak should take a bath at night without clothes after 9 pm and without touching any other clothes, wear fresh white clothes and sit on a white seat facing South direction. Place the magical ‘Sahasraakshari Siddha Chandi Yantra’ and worship it briefly. Take some water on your palm and say your Manokamana or wishes that you want doing Viniyog chanting this mantra,

Viniyog: विनियोग:

अस्य श्रीसर्व-महा-विधा-महा-राज्ञी-सप्तशती-मन्त्र-रहस्याती-रहस्य-मयी, परा-शक्ती-श्रीमदाद्धा-भगवती-सिद्ध-चण्डी, सहस्राक्षरी-महा-विधाया: श्रीमार्कण्डेय-सुमेधा ॠषि, गायत्र्या-नाना छन्दांसि, नव कोटी-रुपा-श्रीमदाद्धा-भगवती सिद्ध-चण्डी देवता, श्रीमदाधा-भगवती-सिद्ध-चण्डी-प्रसादाद-खिलेष्टार्थे जपे पाठे विनियोग:।  

After Viniyog, Sadhak should touch all parts of your body as mentioned in a Hrishyaadi Nyas and Angga Nyas. Next place the picture of Siddha Chandi in front then join your both palms and meditate on Yantra.

Hrisyaadi Nyas ॠष्यादी न्यास:

 श्रीमार्कण्डेय-सुमेधा-ॠषियां, शिरसे नम: । गायात्र्यादी-नाना छन्दोभ्यौ नम: मुखे: । नव-कोटी-शक्ती-रुपा-श्रीमदाधा-भगवती-सिद्ध-चण्डी-प्रसादा-दखिलेष्टार्थे जपे पाठे विनियोगाय नम: सर्वाङ्गे।  

Angga Nyas अङ्ग न्यास :

ॐ श्री सहस्रारे। ॐ ह्रीं नमो माले। ॐ क्लीं नमो नेत्र-युगले। ॐ एइं नम: हस्त-युगले। ॐ श्री नम: हृदये। ॐ क्लीं नम: कटौ। ॐ ह्रीं नम: जङ्घा-द्वये। ॐ श्री नम: पादादी-सर्वाङ्गे।  

Dhyan ध्यान:

ॐ या चण्डी मधु-कैटभादी-दलनी या माहिषो-न्मुलनी, या धुम्रेक्षण-चण्ड-मुण्ड, मथनी या रक्त-बिजाशनी। शक्ती-शुम्भ-निशुम्भ-दैत्य-दलनी, या सिद्धी-दांत्री परा सा देवी नव-कोटी-मुर्ती-संहिता मां पातु विश्वेश्वरी।।  

After finishing Dhyan, light a ghee lamp in front of you. Next chant the following Mahavidya Mantra imagining the image of Bhagawati Kali in the base of light of ghee lamp. Sadhak should chant this Mantra 51 rounds or 101 rounds in one night. The ritual to accomplish this Sadhana is 101 Chants in one night. This ritual can be accomplished in one night.

सहस्राक्षरी सिद्ध चण्डी महाविधा मंत्र

ॐ एइं श्रीं ह्रिसौ श्रीं एइं ह्रीं क्लीं सौ: सौ: ॐ एइं ह्रीं क्लीं श्रीं जय महा-लक्ष्मी, जगदाद्धे, विजये-सुरा-सुर त्रिभुवन-निदाने, दयांकुरे, सर्व देव-तेजो-रुपिणी, विरंच-संस्थिते, विधी-वरदे सच्चिदानन्दे, बिष्णु-देहाब्रिते, महा-मोहिनी, मधु-केटभादी-घोषिणी, नित्य-वरदान-तत्परे, महा-सुधाब्धी -वासिनी, महा-तेजो-धारिणी, सर्वाधारे, सर्व-कारण-कारीणे, अचिन्त्य रुपे, ईन्द्रादी-सकल-निर्जर-सेबिते, साम-गान-गायनपरिपुर्णोदय कारीणी, बिजये, जयन्ती, अपराजिते, सर्व-सुन्दरी, रक्तांशुके, सुर्य-कोटी-संकाशे, चन्द्र-कोटी-सुशितले अग्नी कोटी-दहन-शिले, यम-कोटी-क्रुरे, वायु कोट-वहन-शिले, ॐकार -नाद-बिन्दु-रुपिणी, निगमागम-भाग-दायिनी, महिषासुर-दलनी, धुम्र-लोचन-बध-परायणे, चण्ड-मुण्ड-शिरच्छेदिनी, रक्त-बिज-रुधिर-शोषिणी, रक्त-पान-प्रिये, योगिनी-भुत-बेताल भैरवादी-तुष्टी-बिधायिनी, शुम्भ-निशुम्भ-शिरच्छेदिनी, निखिलासुर-बल-खादीनी, त्रिदश-राज्यदायिनी, सर्व स्त्री रत्न-स्वरुपिणी, दिव्य-देहिनी, निर्गुणे, सगुणे-सदसद-रुप-धारिणी, सुर-वरदे, भक्त-त्राण-तत्परे, वहु-वरदे, सस्राक्षरे, अयुताक्षरे सप्त-कोटी-चामुण्डा-रुपिणी, नवकोटी-कात्यायनी-रुपे, अनेक लक्षालक्ष-स्वरुपे, ईन्द्राणी, ब्रह्माणी, रुद्राणी, ईशानी, भिमे, भ्रामरी, नारसींही, त्रि-शत-कोटी-देवते, अनन्त-कोटी-ब्रह्माण्ड-नायिके चतु-र्विशांती-मुनी-जन-संस्थिते, सर्व-ग्रन्थ-राज-विराजिते, महा-त्रिपुर-सुन्दरी कामेश-दयिते, करुणा रस-कल्लोलिनी, कल्प ब्रिक्षादी-स्थिते, चिन्ता-मणी-द्वय -मध्यावस्थिते, मणी-मन्दिरे निवासिनी, चापिनी, खड्गिनी, चक्रिणी, गदिनी, शङ्खिनी, पदमिनी, निखिल-भैरवादी-पते, समस्त-योगिनी परीवेष्ठिते, काली, कङ्काली, तोत्तलोत्तले, ज्वालामुखी, छिन्न-मस्तके, भुवनेस्वरी, त्रिपुर-लोक-जननी बिष्णु-वक्षस्थल-कारीणे, अजिते अमिते, अनुपम-चरिते, गर्भ -वासादी-दुखापहारिणी, मुक्ती-क्षेत्राधिष्ठायिनी, शिवे, शान्ते, कुमारी, सप्तदश शताक्षरे, चण्डी चामुण्डे महा-काली-महा-लक्ष्मी-महा-सरस्वती-त्री-विग्रहे प्रसिद प्रसिद, सर्व-मनोरथनी पुरय-पुरय, सर्वारिष्टान छेदय छेदय, सर्व-ग्रह-पिडा-ज्वराग्रे-भय बिध्वंसय बिध्वंसय, सर्व-त्रिभुवन-जातं वशय वशय, मोक्ष-मार्गाणी दर्शय दर्शय, ज्ञान-मार्ग प्रकाशय अज्ञान-तमो नाशय नाशय, धन धान्यादी-ब्रिद्धीं कुरु कुरु सर्व-कल्याणिनी कल्पय कल्पय, मां रक्ष रक्ष, सर्वापदभ्यो निस्तारय निस्तारय, बज्रं-शरिरं साधय साधय एइं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा।